हमने छोड़ दिया अपनों को समझाना, जबसे गैरो ने हमे अपना समझ लिया !! 

बदल जाते है लोग भी यहाँ, ये भी क्या वक़्त से कम है !!

ज़ाहिर है मेरे वक़्त का हर वो कतरा तेरे नाम, जो हर दफा तेरे होने का एहसास जताते है !!

दर्द ने दिल से बात करके कहा, जा बेमौत मर अब वो तेरा न रहा !!

फुर्सत थी उनकी बातों में, मेरा तो उनके बिना बिताए हर लम्हे की तड़प थी !!

वफ़ा करके भी कुछ हासिल न हुआ, फिर भी दिल देता है उनको हज़ारो दुआ !!

हर रोज़ करते है तुम्हारे लौट आने की तमन्ना, इसलिए दिन रात रहने लगे अब चौकन्ना !!

कोशिश तो बहुत की मगर उनका साथ न मिला, यादो में बनाना चाहता था जिनके लिए एक किला !!

ये प्यार का भी अलग दस्तूर है शाहब , एक तर्फे से शुरू हो के बेवफाई पर खत्म होती है !!

इकरार करनी है वो दिल दे अरमाँ, दिल का यूँ उलझे रहना अब सहा नहीं जाता !!